free tracking
Breaking News
Home / ताजा खबरे / मैं मां बनना चाहती हूं,पति को घर जाने दे जज साहव”,पति को छुड़ाने के लिए पत्नी ने कुछ इस तरह लगाई गुहार

मैं मां बनना चाहती हूं,पति को घर जाने दे जज साहव”,पति को छुड़ाने के लिए पत्नी ने कुछ इस तरह लगाई गुहार

दोस्तों यदि कोई इंसान अपराध करता है तो उसे सजा भी जरुर मिलती है .उस इंसान के अपराध को ध्यान में रखते हुए अदालत सजा सुनाती है . लेकिन सजा के दौरान यदि आरोपी के घर में  कोई शादी हो या किसी की मृ-त्यु हो जाए या कोई ऐसा कार्य हो जो उसके बिना न हो सकता हो ऐसे बहुत से कारणों से उसे पैरोल मिल सकती है  .लेकिन आज हम आपको एक ऐसा मामले के बारे में बता ने वाले है जिसमे एक महिला ने पति की पैरोल करने के लिए एक अलग ही वजह बताई .आपको बता दे पत्नी  उम्रकैद में बंद पति की पैरोल करने के लिए कलेक्टर के पास गयी लेकिन पत्नी की वजह कलेक्टर को कुछ ख़ास नही लगी और कलेक्टर ने इस पर गंभीरता से एक्शन नहीं लिया .लेकिन उसके बाद भी पत्नी ने हार नही मानी और वो हाईकोर्ट तक जा पहुंची . उसके बाद अदालत ने पत्नी की दलील पर क्या फैसला लिया ये  जानने के लिए खबर को अंत तक जरुर पढ़े.

पत्नी का पक्ष सुनकर जज ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला


दरअसल, भीलवाड़ा जिले के रबारियों की ढाणी का रहने वाला नंदलाल 6 फरवरी 2019 से अजमेर जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है। सजा मिलने से कुछ समय पहले ही उसकी शादी हुई थी। लेकिन अपराध के मामले के चलते उसे जेल हो गई। उसके बाद पहली बार उसे पिछले साल मई में 20 दिन की पैरोल दी गई। इस बीच कोरोना और अन्य कारणों के चलते करीब दो साल तक पत्नी और परिवार से नंदलाल की मुलाकात संभव नहीं हो सकी।

कलेक्टर और जेल अफसरों के पास अर्जी लेकर पहुंची पत्नी


इस बीच नंदलाल की पत्नी कुछ दिन पहले जेल अफसरों के पास वकील के साथ पहुंची और कहा- वह मां बनना चाहती है, अगर पति को कुछ दिन की पैरोल पर छोड़ दें तो उसका यह अधिकार पूरा हो सकता है। जेल अफसरों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जब जेल अफसरों की ओर से कोई जवाब नहीं आया तो वो कलेक्टर के पास पहुंची और अपना प्रार्थना पत्र दिया। कलेक्टर ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया और पेंडिग कर दिया। जब पत्नी का सब्र जवाब दे गया तो वह सीधे हाईकोर्ट जा पहुंची और जज के सामने अपना पक्ष रखा। पत्नी ने कहा-पति से अपराध हुआ है, लेकिन उनकी मंशा नहीं थी। जेल और पुलिस के तमाम नियमों का वे सख्ती से पालन कर रहे हैं। प्रोफेशनल अपराधी वे नहीं हैं।

जज ने कहा कि पैरोल में इस तरह की कंडीशन के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं, लेकिन…


हाईकोर्ट में जज संदीप मेहता व फरजंद अली की खंडपीठ ने इस मामले को सुना और कहा- पैरोल में संतान उत्पत्ति के लिए वैसे तो कोई साफ नियम नहीं हैं। लेकिन वंश के संरक्षण के उद्देश्य से संतान होने को धार्मिक दर्शन भारतीय संस्कृति और विभिन्न न्यायिक घोषणाओं के माध्यम से मान्यता दी। जजों ने ऋग्वेद व वैदिक भजनों का उदाहरण दिया और संतान उत्पत्ति को मौलिक अधिकार भी बताया। कोर्ट ने पक्ष सुनने के बाद कहा- दंपती को अपनी शादी के बाद से आज तक कोई समस्या नहीं है। हिंदु दर्शन के अनुसार गर्भधारण करना 16 संस्कारों में सबसे ऊपर है, इस कारण अनुमति दी जा सकती है।

About Megha

Leave a Reply

Your email address will not be published.