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जान जाने पर भी नही टूटा प्रेम, पति का शव देखकर पत्नी ने भी त्यागे प्राण

दोस्तों जीवन में सभी को जीवन साथी की जरूरत होती है .जीवन साथी वो होते है जो सुख -दुःख में एक – दुसरे का साथ देते है .एक दुसरे को समझते है सपोर्ट करते है .पति -पत्नी का रिश्ता एक ऐसा रिश्ता है जिसमे दोनों लड़ते -झगड़ते है दोनो  में कितनी ही नोकझोक ही क्यों न हो जाये थोड़ी देर बाद फिर पहले की तरह हंसने बोलने लग जाते है .हर प्यार करने वाले  साथ जीने मरने की कसमे खाते है वादे  करते है .और सात जन्मो तक एक दुसरे का साथ मांगते है .क्या आपको लगता है सभी अपने किये वादों को निभाते होगे .नही ऐसा बिलकुल भी नही होता किसी के दुनिया से  चले जाने के बाद कोई उसके साथ नही जाता . लेकिन आज आपको एक ऐसी प्रेम कहानी के बारे में बताने वाले है जिसने पति के जाने के बाद भी नही छोड़ा पति का साथ .

 

विवाह के बंधन में बंधने के बाद दो लोग अपने बारे में ना सोच कर हमेशा एक दूसरे के लिए ही सोचते हैं और एक दूसरे के लिए ही जीते हैं। आज हम आपको नागौर से सामने आए एक मामले के बारे में बताने वाले हैं, जहां पर साथ जीने-मरने की कसमें खाने वाला जोड़ा एक साथ ही दुनिया को छोड़ कर चला गया। प्यार की अनोखी दास्तां के गवाह नागौर के लोग बने। इसे संयोग माना जाए या सच्चा प्यार… पर जिसने भी यह दृश्य देखा, उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े। कहता है सिंदूर तेरा, तेरी बिंदिया कहती है… लाखों में कोई एक सुहागन, सदा सुहागन रहती है…. वर्ष 1986 में आई फिल्म सदा सुहागन की यह वो लाइनें हैं, जो नागौर में लोगों ने खुद अपनी आंखों से सच होती हुई देखी तो उनकी आंखों से आंसू रुक नहीं पाए। यह दृश्य देखने के बाद लोगों की आंखों से आंसू निकलने लगे गए। दरअसल, हम आपको जिस मामले के बारे में बता रहे हैं यह मामला राजस्थान में नागौर जिले के रूण गांव से सामने आया है।

बता दें यहां पर एक जोड़े ने 58 साल लंबा दांपत्य जीवन जीने के बाद एक साथ ही अपनी आखिरी सांसे ली। ऐसा बताया जा रहा है कि इसने एक साथ ही दुनिया को अलविदा कह दिया। गांव में पहले से ही इस प्यार के जोड़े की मिसाल दी जाती थी, लेकिन जब दोनों का एक साथ निधन हो गया तो उसके बाद एक ही चिता पर दोनों का अंतिम संस्कार भी किया गया। अंतिम संस्कार की सभी रस्में दोनों बेटियों के द्वारा ही निभाई गईं।प्राप्त जानकारी के अनुसार 78 साल के राणाराम सेन रूण गांव के निवासी हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि उन्हें सांस से जुड़ी हुई दिक्कत थी। इलाज के लिए उन्हें पहले नागौर और फिर जोधपुर भेजा गया था परंतु जोधपुर में रविवार की सुबह उनकी मृत्यु हो गई, जिसके बाद उनके शव को घर लाया गया।

लेकिन जब उनकी पत्नी भंवरी देवी ने अपने पति का शव देखा तो उनसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हुआ। ऐसा बताया जा रहा है कि पति का शव देखते ही पत्नी ने भी अपने प्राण त्याग दिए। पति का शव देखकर वह भी दुनिया को छोड़ कर हमेशा के लिए चली गईं।गांव वाले दोनों के एक साथ मरने की बात को बहुत ही सौभाग्यशाली मान रहे हैं। गांव में एक साथ दोनों की अर्थियों की विदाई चर्चा का विषय बनी हुई है। लोगों का ऐसा बताना है कि लाखों में कुछ ही जोड़े होते हैं जो इतना लंबा दांपत्य जीवन जीने के पश्चात इस तरह से एक साथ चले जाते हैं।

गांव वालों का बताना है कि राणाराम सेन शनि देव के भक्त थे और मंदिर में पूजा-पाठ किया करते थे। पति-पत्नी दोनों में ही बहुत ज्यादा प्रेम था। यह 58 साल से एक दूसरे का साथ निभा रहे थे। जब दोनों की मृत्यु हो गई तो उनकी शादीशुदा बेटियों ने ही अपने माता-पिता की अर्थी को कंधा दिया।बैंड बाजे के साथ अंतिम यात्रा निकाली गई और पूरा गांव उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुआ था। दोनों पति-पत्नी को एक ही चिता पर मुखाग्नि दी गई। फेरों के के समय साथ जीने-मरने की कस्में इन्होंने सच साबित कर दिखाई। पूरे गांव में इसकी चर्चा हो रही है।

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