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आखिर क्या काम करती थी, राजकुमारी के साथ तोहफे में दी जाने वाली दासिया

दोस्तों राजा -महाराजाओ के बड़े -बड़े महलो में हजारो दास -दासिया होते थे .जो महल में रहने वाली रानियों और राजाओ के कार्य करते थे .युद्ध  के दौरान जब कोई राजा दुसरे राजा को हराकर उसके राज्य पर जीत  हासिल करता था .हारे हुए राजा के धन और राज्य पर उस राजा का अधिकार होता था .जीत हासिल कर जब राजा अपने महल वापिस जाता था तो अपने साथ हारे हुए राजा की रानी और उनकी  दासियों को भी अपने महल ले जाते थे . राजा -महाराजा महल की स्त्रियों की शिक्षा का पूरा  ध्यान रखते थे और शिक्षा का प्रबंध महल के अंदर ही करवाते थे ताकि उन्हें कोई समस्या न हो . और इस बात का खास ध्यान रखा जाता था कि  रानी के साथ रहने वाली दासिया सुशिक्षित होने के साथ -साथ युद्ध कला में निपुण भी हो .

हारे हुए राजा बहुत कुछ सहना पड़ता है

युद्ध में हारे हुए राजपरिवार के महल की बेशकीमती चीजें जीते हुए राजा के राजमहल में भेज दी जाती थीं युद्ध में हारे हुए राजपरिवार के पुरुष सदस्यों को हिन्दू राजा छोड़ देते थे या कारागार में डाल देते थे .और रानी को अपने हरम महल में रख देते थे , जबकि मुस्लिम सुलतान हारे हुए पुरुष राजपरिवार के सदस्यों को जनता के सामने इतनी दर्दनाक मौत मारते थे की देखने वाले की रूह काँप जाये, बलबन और अलाउद्दीन खिलजी ने जाटों को युद्ध में हराकर उनके सिरों को काटकर २०-३० फिट ऊंची दीवारें बनवायी थीं.

स्त्रियां अपने प्राण निछावर कर देती थी

राजपरिवार की दासियों से लेकर महारानी तक को राजदरबार में सुल्तान के फरमान से बुलाया जाता था , महारानी और राजकुमारियों को सुल्तान की सेवा में लगा दिया जाता था और शेष को घुड़सवारों, पैदल सेना में बाँट दिया जाता था.जब हिन्दू स्त्रियों की शारीरिक दशा ख़राब हो जाती थी तो उन्हें बाजारों में हथकड़ी लगाकर अर्धनग्न करके उनकी बोली लगवाई जाती थी, अतः हारे हुए हिन्दू राजपरिवार की स्त्रियां आग में कूद कर पहले ही जान दे देती थीं.

यह सभी काम करने पड़ते थे दासियों को

हिन्दू और मुस्लिम राजा महल की स्त्रियों की शिक्षा की व्यवस्था महल में ही करवाते थे रानी और राजकुमारी के साथ जो दासियाँ लगाई जातीं थी वह अत्यंत सुशिक्षित, युद्ध कला में निपुण,सुन्दर होती थीं, जिससे राजकुमारियों पर प्रभाव पड़े.विवाह उपरांत राजकुमारी के साथ बहादुर, बुद्धिमान एक या दो दासियों को भेजा जाता था .जो राजकुमारी के जीवन की रक्षा कर सकें क्योंकि राजपरिवार में षड्यंत्र बहुत रचे जाते थे .इन दासियों का कार्य राजकुमारी को शासन के कार्यों से सम्बन्धी सूचनाएं देना होता था और पुत्र उत्तराधिकार प्राप्त करेगा या नहीं. इन दासियों को आजीवन अविवाहित रहना होता था और अपनी राजकमारी- महारानी और उनके पुत्रों के जीवन की रक्षा करना होता था. पन्ना धाय और मंथरा प्रमुख हितैषी दासियाँ थीं.

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