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युक्रेन में भारतीय छात्रों के साथ हो रही ना-इंसाफी, ट्रेन में चढ़ने से रोक रही है यूक्रेन की पुलिस रेलवे स्टेशन खारकीव पर ही रोके जा रहे छात्र

दोस्तों युक्रेन के हालातो से आप सब वाकिफ है . ऐसे सब सुरक्षित स्थानों की और भाग रहे है लेकिन ऐसे माहौल में युक्रेन में भारतीय छात्रों के साथ न इंसाफी हो रही है .ऐसे समय सब को अपनों की सुरक्षा की चिंता हो रही है .जैसे भारत सरकार जल्दी से जल्दी भारतीय छात्रों को भारत लाने के प्रयास कर रही है उसी तरह युक्रेन की सेना पहले अपने देश के नागरिको को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही है . लेकिन ऐसे समय में सभी की सुरक्षा की जिम्मेदारी युक्रेन पुलिस  की है .खबर सामने आई है कि अपने लोगो को बचाने के लिए भारतीय छात्रों को ट्रेन में चढने से रोक रही है युक्रेन पुलिस  .

युद्धग्रस्त उत्तर-पूर्वी यूक्रेन के खारकीव शहर में मंगलवार को एक भारतीय छात्र की फायरिंग में मौत हो गई है. कर्नाटक का रहने वाला 21 वर्षीय नवीन शेखरप्पा खाने पीने का सामान लेने एक स्टोर के बाहर खड़ा था, इसी दौरान रूसी सैनिकों की गोलीबारी का शिकार हो गया.खबर है कि हमले से बचने के लिए निकल रहे भारतीयों को यूक्रेनी पुलिस की भी प्रताड़ना सहनी पड़ रही है. ‘बड़ी तादाद में खारकीव रेलवे स्टेशन पर खड़े छात्रों को ट्रेन में नहीं बैठने दिया जा रहा है. यूक्रेनी पुलिस अपने लोगों को पहले बाहर निकाल रही है. बता दें कि खारकीव से छात्र पश्चिमी यूक्रेन के लविव (Lviv) या उज़रोहोद (Uzhhrohod) के लिए ट्रेन पकड़ने का इंतजार कर रहे हैं.यूक्रेन की राजधानी कीव में मौजूद ‘आजतक’ संवाददाता राजेश पवार के मुताबिक, उनके पास खारकीव से लगातार भारतीय छात्रों के फोन कॉल्स आ रहे हैं. छात्रों का कहना है कि उनको ट्रेन में नहीं चढ़ने दिया जा रहा है और यूक्रेन की पुलिस उनको ऐसा करने से रोक रही है.

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दरअसल, यूक्रेन के दूसरे शहरों में फंसे छात्र जैसे-तैसे टैक्सी के जरिए खारकीव रेलवे स्टेशन तक पहुंचे हैं और ट्रेन के जरिए बाहर निकलने की तैयारी कर रहे हैं. यूक्रेन का हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण भारत वहां फंसे अपने नागरिकों को पड़ोसी देशों पोलैंड, हंगरी और रोमानिया के बॉर्डर (यूक्रेन से लगी सीमा) से एयरलिफ्ट कर स्वदेश वापस ला रहा है. ‘आपरेशन गंगा’ अभियान के तहत छह उड़ानों से अब तक 1396 भारतीयों को स्वदेश लाया गया है.बता दें कि विदेश मंत्रालय ने भी एडवाइजरी जारी कर कहा है कि जल्द से जल्द भारतीय नागरिक संकट से घिरे यूक्रेन से बाहर निकलें. एडवाइजरी में एक सप्ताह पहले ही कह दिया गया था कि जिन भारतीय छात्रों का यहां रहना जरूरी नहीं है, वो यूक्रेन छोड़ दें. छात्रों को वापस लाने के लिए फ्लाइट्स और एक्स्ट्रा फ्लाइट्स भी संचालित की गई थीं, लेकिन उन्होंने यूक्रेन में रहना ही उचित समझा. हालांकि, अब सभी वहां से किसी भी कीमत पर निकलना चाह रहे हैं.

विशेषज्ञों का दावा है कि रूस अब यूक्रेन के सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर खारकीव और राजधानी कीव पर आज कल में बड़े हमले कर सकता है. इसी के मद्देनजर रहवासियों को बंकर में छिपने या शहर छोड़कर भागने की सलाह दी जा रही है. कीव में एडवाइजरी जारी की गई है कि सभी नागरिक शेल्टर्स और बंकरों में चले जाएं और घर पर बिल्कुल भी न रहें.’आजतक’ संवाददाता के अनुसार, सोमवार को ही 1500-1600 से ज्यादा छात्रों को कीव से ट्रेन के लिए निकाला गया है. वहीं, एक बार कीव पर अटैक शुरू हो जाता है तो फिर यहां से नागरिकों का निकलना असंभव हो जाएगा. अच्छी बात यह है कि अभी खारकीव से ट्रेनें यूक्रेन के सीमावर्ती इलाकों तक संचालित की जा रही हैं. सूत्रों के अनुसार, खारकीव पर रूस की सेना का कब्जा हो गया है. हालांकि, यूक्रेन ने इन खबरों को निराधार बताया है.

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