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धरती पर मंडरा रहा है भयंकर तूफ़ान,पृथ्वी से टकराते ही बिजली हो जायेगी गुल, मोबाईल फोन होने बेजान

दोस्तों बहुत बार आपको  ऐसी खबरे सुनने को मिली होगी जिसमें धरती पर खतरा होने का दावा किया गया हो .इनमे से कुछ खबरे सच भी साबित हुयी होगी  और कुछ गलत भी . आपकी जानकारी के लिए बता दे एक ऐसी ही खबर सामने आ रही है जिसमे फिर से धरती पर खतरा होने का दावा किया जा रहा है .खबर के मुताबिक आने वाले तूफ़ान से बिजली जाने की आशंका है जिसकी वजह से मोबाइल फोन  भी काम नही करंगे . आने वाले इस तूफ़ान की वजह से और  क्या -क्या नुक्सान हो सकते है जानने के लिए खबर को अंत तक जरुर पढ़े .

अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा और नेशनल ओशिएनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन  का कहना है कि कोरोनल माल एजेक्शन (सीएमई) तीव्र ऊर्जा के साथ अगले 24 घंटे में धरती से टकरा सकती है.जिससे एक सौर तूफान उठेगा, जो बिजली के ग्रिड और इससे जुडे़ दूसरे सामान को खराब कर सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, ये तूफान जी2 लेवल का हो सकता है. नासा और एनओएए का कहना है कि इस खतरनाक तूफान के तेज गति के साथ धरती के चुंबकीय क्षेत्र से टकराने की आशंका है.सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्पेस साइंसेज इंडिया (सीईएसएसआई) का कहना है, ‘हमारा मॉडल बताता है कि इसका धरती पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है, ये रफ्तार 429-575 किलोमीटर प्रति सेकेंड हो सकती है. वर्तमान में सौर हवा और पृथ्वी के पास का अंतरिक्ष पर्यावरण की स्थिति सामान्य हो रही है.’ जाने माने अंतरिक्ष मौसम भौतिकी विज्ञानी डॉक्टर तमिथा स्कोव ने भी इसी तरह की चेतावनी जारी की है. उन्होंने कहा कि इससे जीपीएस सिस्टम प्रभावित हो सकता है.

क्या हो सकता है नुकसान?

सौर तूफान के कारण धरती पर अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बिजली जा सकती है. रेडियो सिग्नल में व्यावधान आ सकता है. रेडियो संचालकों को व्यावधान का सामना करना पड़ सकता है. जीपीएस इस्तेमाल करने वाले भी दिक्कतें महसूस कर सकते हैं. सौर तूफान का असर मोबाइल फोन के सिग्नल पर भी हो सकता है. इससे ब्लैकआउट का भी खतरा है. यही वजह है कि इस तूफान को लेकर हर जगह चिंता जताई जा रही है. इसकी कैटेगरी जी2 रखी गई है. बेशक यह जी5 जितना खतरनाक नहीं है, लेकिन फिर भी इससे काफी नुकसान हो सकता है.

क्या होता है सौर तूफान?

एनओएए का कहना है कि 14 अप्रैल को मध्य, तो वहीं 15 अप्रैल को छोटा सौर तूफान धरती को प्रभावित करेगा. सौर तूफान को जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म और सोलर स्टॉर्म भी कहा जाता है. जो सूरज से निकलने वाला वो रेडिएशन है, जो पूरे सौर मंडल को प्रभावित कर सकता है. इसे धरती के चुंबकीय क्षेत्र पर असर डालने वाली आपदा भी कहते हैं. जिसका असर पृथ्वी के आसपास के वातावरण की ऊर्जा पर भी पड़ता है. सौर तूफान कोई पहली बार नहीं आ रहा है, बल्कि इससे पहले भी साल 1989 में यह घटना हो चुकी है. उस वक्त इसने कनाडा के क्यूबेक शहर को प्रभावित किया था, जिससे वहां की बिजली 12 घंटे के लिए चली गई थी. जिसके कारण लोगों को काफी परेशान होना पड़ा था. इससे पहले ये तूफान साल 1859 में आया था. तब यूरोप और अमेरिका में टेलीग्राफ नेटवर्क ही नष्ट हो गया था.

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