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आखिरकार बिकने जा रही है रिलायंस,अडानी की कम्पनी लगाएगी बोली

दोस्तों फेमस बिजनेसमैन और रिलाइंस इंडस्ट्री के मालिक मुकेश अम्बानी के भाई अनिल अंबानी की कम्पनी रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड के  कर्ज में पूरी तरह डूबने के बाद बिकने जा  रही  है . आपको बता दे बड़े -बड़े उद्योगपतियो ने इस कम्पनी को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है . ऐसे में खबर सामने आई है कि इन सब के साथ अडानी की कम्पनी भी रिलायंस के लिए बोली लगाने वाली है . अब देखना ये है कौब सबसे ज्यादा बोली लगा कर बनेगा रिलाइंस का नया  मालिक .यदि आप भी जानना चाहते हो तो खबर को अंत तक पढ़े .

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से नियुक्त एडमिनिस्ट्रेटर ने बोली जमा करने की आखिरी तारीख को 11 मार्च से बढ़ाकर 25 मार्च कर दिया है. आरबीआई ने 29 नवंबर को रिलायंस कैपिटल के बोर्ड को गवर्नेंस में कमी और पेमेंट डिफॉल्ट के कारण भंग कर दिया था.सूत्रों ने बताया कि जिन अन्य कंपनियों ने रिलायंस कैपिटल के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट जमा कराया है उनमें अर्पवुड, वर्दे पार्टनर्स, मल्टीपल्स फंड, निप्पन लाइफ, जेसी फ्लॉवर्स, ब्रुकफील्ड, ऑकट्री, अपोलो ग्लोबल, ब्लैकस्टोन और हीरो फिनकॉर्प शामिल हैं. यह तीसरी सबसे बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) है जिसके खिलाफ केंद्रीय बैंक ने हाल में दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (Insolvency and Bankruptcy Code) के तहत दिवाला कार्यवाही शुरू की है. दो अन्य कंपनियां श्रेई ग्रुप की एनबीएफसी (Srei Group NBFC) तथा दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन (DHFL) हैं.

पूरी कंपनी के लिए बोली लगाई गई है

बोली दाखिल करने की समय सीमा कुछ संभावित बोलीदाताओं के अनुरोध पर बढ़ाई गई है, जिन्होंने रुचि पत्र (ईओआई) दाखिल करने के लिए कुछ और समय मांगा था. सूत्रों ने बताया कि ज्यादातर बोलीदाताओं ने पूरी कंपनी के लिए बोली लगाई है. रिजर्व बैंक ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र के पूर्व कार्यकारी निदेशक नागेश्वर राव वाई को इस गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी का प्रशासक नियुक्ति किया था. इससे पहले इसी साल फरवरी में रिजर्व बैंक द्वारा नियुक्त प्रशासक ने रिलायंस कैपिटल के रुचि पत्र आमंत्रित किए थे.

बोलीदाताओं के पास दो विकल्प

बोलीदाताओं के पास दो विकल्प हैं. पहला विकल्प ये है कि वे पूरी कंपनी (रिलायंस कैपिटल लिमिटेड) के लिए बोली लगाएं. रिलायंस कैपिटल के अंतर्गत कुल आठ सब्सिडियरीज कंपनी आती हैं. बोलीदाता इसमें से एक और अधिक कंपनी के लिए भी बोली लगा सकते हैं.

ये हैं आठ सब्सिडियरीज कंपनियां

रिलायंस कैपिटल के सब्सिडियरीज की बात करें तो इसमें रिलायंस जनरल इंश्योरेंस, रिलायंस निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस, रिलायंस सिक्यॉरिटीज, रिलायंस असेट री-कंस्ट्रक्शन कंपनी, रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस शामिल हैं.

कंपनी पर 40 हजार करोड़ का भारी-भरकम कर्ज

सितंबर 2021 में रिलायंस कैपिटल ने अपने एनुअल जनरल मीटिंग में शेयर होल्डर्स को बताया था कि कंपनी पर कुल कर्ज 40 हजार करोड़ रुपए का है. दिसंबर तिमाही में कंपनी का नुकसान घटकर 1759 करोड़ रुपए हो गया था. दिसंबर 2020 तिमाही में कंपनी का कुल नुकसान 3966 करोड़ रुपए रहा था. रिलायंस कैपिटल की स्थापना साल 1986 में हुई थी.

 

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