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8 प्राइवेट स्कुल दर्ज़नो कॉलेज समेत करोड़ो की सम्पत्ति का मालिक निकला सरकारी स्कूल का एक सहायक शिक्षक,

दोस्तों शिक्षक यानि गुरु जो बच्चो को शिक्षा और ज्ञान देकर समाज और दुनिया में जीने लायक बनाता है उन्हें अछे और बुरे में फर्क करना सिखाता है और हमेशा गुरु अपने शिष्यों को गलत मार्ग को छोडकर सही मार्ग पर चलने की राह दिखाता है .लेकिन यदि गुरु ही गलत मार्ग अपना ले तो शिष्यों को क्या सिखाएगा .यदि एक सरकारी शिक्षक की सैलरी की बात करे तो कितनी होगी 15000 ,20000 या ज्यादा से ज्यादा 25000 होगी .अब इतनी सैलरी में 10 -15 सालो में  उस शिक्षक की कुल सम्पत्ति  कितनी होगी .यदि हम 25000 लगा कर  चले तो 15 सालो में  लगभग 375000 होगी . लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मामले के बारे में बताने वाले है जिसमे सरकारी स्कूल के एक सहायक शिक्षक के पास करोड़ो की सम्पत्ति देख अधिकारियों  की आँखे फटी की  फटी रह गयी .क्या है पूरा मामला जानने के लिए खबर को अंत तक जरुर पढ़े .

एमपी में सरकारी शिक्षक की सैलरी 50-70 हजार रुपये के करीब है। इतनी सैलरी में एक शिक्षक के पास लाखों की संपत्ति हो सकती है। ग्वालियर में ईओडब्ल्यू की छापेमारी में एक शिक्षक के पास करोड़ों की संपत्ति का खुलासा हुआ है। शिक्षक के पास ग्वालियर से सबसे पॉश इलाके में फ्लैट है। इसके साथ ही उसके अपने आठ निजी स्कूल और दर्जनों कॉलेज हैं। साथ ही करोड़ों रुपये की जमीन के कागजात मिले हैं। ईओडब्ल्यू ने शिक्षक के घर पर शनिवार की सुबह छापेमारी शुरू की थी। देर रात तक चली कार्रवाई में इतनी संपत्ति मिली है कि अधिकारियों को तारे दिखने लगे हैं। भ्रष्ट शिक्षक का नाम प्रशांत परमार है। छापेमारी के दौरान उसके घर से लाखों रुपये कैश मिले हैं।

एमपी में सरकारी शिक्षक के पास ‘कुबेर’ का खजाना मिला

शिक्षक के घर से लाखों रुपये कैश मिले

सहायक शिक्षक प्रशांत परमार ग्वालियर के सत्यम टावर में रहता है। ईओडब्ल्यू की छापेमारी के दौरान उसके घर से 5.90 लाख रुपये कैश मिला है। सहायक शिक्षक के खिलाफ ईओडब्ल्यू को कई शिकायत मिली थी। शिकायतों की जांच कर आगे की कार्रवाई की गई है। छापेमारी के दौरान ईओडब्ल्यू ने खुलासा किया है कि इसके कई कॉलेज, स्कूल और मैरिज गार्डन हैं।

करोड़ का फ्लैट, चार आलीशान ऑफिस

ग्वालियर जिले के घाटीगांव ब्लॉक स्थित सरकारी स्कूल में प्रशांत परमार सहायक शिक्षक के रूप में पदस्थ है। ईओडब्ल्यू अधिकारियों के मुताबिक कलेक्ट्रेट रोड सिटी सेंटर के पास सत्यम टॉवर में वह परिवार के साथ रहता है। फ्लैट में छापेमारी के दौरान की तस्वीरें सामने आई हैं। इंटीरियर देखकर ही अधिकारियों की आंखें चौंधिया गई हैं। फ्लैट में लाखों रुपये इंटीरियर पर खर्च किए गए हैं। इसके साथ ही शहर के अलग-अलग इलाकों में प्रशांत के चार ऑफिस है। वह मूल रूप से राजस्थान का रहने वाला है।

आठ स्कूल और कई कॉलेज

छापेमारी के दौरान यह बात सामने आई है कि सहायक शिक्षक प्रशांत परमार के पास आठ निजी स्कूल हैं। इसके साथ ही कई कॉलेज भी हैं, कुछ में पार्टनरशिप है। मिली जानकारी के अनुसार प्रखर अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर, ब्राइट नर्सिंग कॉलेज, प्राशी नर्सिंग कॉलेज, परमार इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टीडज, परमार एजुकेशन सेंटर, निर्मल वाटिका और परमार पैलेस मैरिज गार्डन के दस्तावेज मिले हैं। इसके साथ ही बीएड और नर्सिंग कॉलेज के बारे में भी जानकारी सामने आई है, जिसकी जांच ईओडब्ल्यू कर रही है। एमपी के अलावा दूसरे राज्यों में भी उसके संस्थान हैं.

25 करोड़ रुपये की है जमीन

वहीं, छापेमारी के दौरान प्रशांत के फ्लैट से 2.25 करोड़ रुपये की जमीन की रजिस्ट्री के कागजात मिले हैं। इसका बाजार मूल्य आज की तारीख में 25 करोड़ रुपये के करीब है। इसके साथ ही 36 लाख रुपये के गहने भी मिले हैं। इसके पास नूराबाद में जो जमीन है, वह सात बीघा में है। इसके अलावे भी एजेंसी को कई बेनामी संपत्तियों के बारे में जानकारी मिली है। इन सभी की जांच की जा रही है।

16 साल की सरकारी नौकरी में 20 लाख सैलरी

प्रशांत परमार मूल रूप से राजस्थान का रहने वाला है। वह 2006 में शिक्षा विभाग में वर्ग-3 में सहायक शिक्षक के रूप में भर्ती हुआ था। 16 साल की नौकरी में कुल 20 लाख रुपये की कमाई सैलरी से हुई है। मगर इसके पास संपत्ति करोड़ों रुपये की है। इसने 2008 से शिक्षा के क्षेत्र में कारोबार शुरू किया था। इसके बाद इसका कारोबार फैलता गया। वहीं, प्रशांत को आरटीआई के एक दस्तावेज गुम हो जाने के मामले में चार दिन पहले ही निलंबित कर दिया गया है। छापेमारी की भनक उसे पहले ही लग गई थी। इसलिए फरार चल रहा है।

 

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