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दुनिया का सबसे रहस्य मई गाँव जहाँ जाने के नाम से ही घबरा जाते है लोग

दोस्तो कुछ जगहो के साथ कोई ना कोई कहानी भी जुड़ी हुई होती है आज हम आपको दुनिया के एक ऐसे अनोखे गांव के बारे में बताएंगे जिसे मु-र्दों का शहर नाम दिया गया है इस गांव के बारे में कहा जाता है कि एक बार जो इंसान यहां कदम रख लें उसकी जिंदगी कुछ ही दिनों की मेहमान बन कर रह जाती है और इस गांव में आया कोई भी व्यक्ति वापस नहीं लौटता पता  था जिन लोगों को भी इस गांव के बारे में पता है उसका नाम सुनकर ही डर जाते  है  और इस गाँव में बहुत कुछ है चलिए जानते है इस गाँव  के बारे में विस्तार से ..

अनगिनत तहखाना नुमा इमारतें

बाहर से खूबसूरत दिखने वाली इस जगह को ‘सिटी ऑफ द डेड’ यानी ‘मु’र्दों का शहर’ के नाम से भी जाना जाता है। यह जगह ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के बीच छिपी हुई है। यहां पर सफेद पत्थरों से बनी अनगिनत तहखाना नुमा इमारतें है। इनमें से कुछ तो 4 मंजिला ऊंची भी है।

विशाल कब्रिस्तान

इमारत की प्रत्येक मंजिल में लोगों के शव दफनाए हुए है। जो इमारत जितनी ऊंची है उसमें उतने ही ज्यादा शव है। बताया जाता है कि इन कब्रों को 16वीं शताब्दी में बनवाया गया था। यह एक विशाल कब्रिस्तान कहते हैं कि हर इमारत एक परिवार से संबंधित है, जिसमें सिर्फ उसी परिवार के सदस्यों को दफनाया गया है। इतना ही नहीं इस जगह को लेकर स्थानीय लोगों के बीच तरह-तरह की मान्यताएं हैं।

उनका मानना है कि इन झोपड़ीनुमा इमारतों में जाने वाला कभी लौटकर नहीं आता, हालांकि कभी-कभार पर्यटक इस जगह के रहस्य को जानने के लिए आते रहते हैं। इस जगह तक पहुंचने का रास्ता भी बेहद ही मुश्किल है। पहाड़ियों के बीच तंग रास्तों से होकर यहां पहुंचने में करीब तीन घंटे का समय लगता है। यहां का मौसम भी हमेशा खराब रहता है जो सफर के लिए एक बहत बड़ी रुकावट है।

यहां कब्रों के पास नावें मिली हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां शवों को लकड़ी के ढांचे में दफनाया गया था, जिसका आकार नाव के जैसा था। हालांकि ये अभी रहस्य ही बना हुआ है कि आस-पास नदी मौजूद ना होने के बावजूद यहां तक नाव कैसे पहुंचीं। नाव के पीछे मान्यता ये है कि आत्मा को स्वर्ग तक पहुंचने के लिए नदी पार करनी होती है इसलिए शव को नाव पर रखकर दफनाया जाता है।

पुरातत्वविदों को यहां हर तहखाने के सामने एक कुआं भी मिला है जिसके बारे में कहा जाता है कि लोग अपने परिजनों को यहां दफनाने के बाद कुएं में सिक्का फेंकते थे। अगर सिक्का तल में मौजूद पत्थरों से टकराता है तो इसका मतलब होता था कि आत्मा स्वर्ग तक पहुंच गई।

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