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महादेव के इस मंदिर को स्वर्ग में बना कर धरती पर उतारा गया, लेकिन फिर भी नहीं होती इस मंदिर में कभी कोई पूजा

महादेव का एक ऐसा मंदिर…. जिसे स्वर्ग में बना कर धरती पर उतारा गया , लेकिन क्या वजह है कि इस मंदिर में कभी कोई पूजा नही होती क्या रहस्य है इसके पीछे …आज तक वैज्ञानिक भी नही समझ पाए है, आज हम आपको महादेव का एक ऐसा अनोखा मंदिर दिखाने जा रहे है जिसके बारे में सुन कर हर कोई हैरान रह जाता है !

दोस्तों महाराष्ट के ओरंगावाद में स्तिथ ये कैलाश शिव मंदिर पूरी दुनिया के लिए एक रहस्य बना हुआ है ! बताया गया है कि एलोरा की गुफायो में बना हुआ ये शिव मंदिर 6000 साल पुराना है ! जिसको बनाने के लिए 7000 मजदूरो ने लगभग 150 साल तक लगातार काम किया था ! इस शिव मंदिर की ख़ास बात ये है कि इसमें एक पर्वत के सामान बहुत बड़ा शिवलिंग है ! लेकिन हैरानी की बात ये है कि इस मंदिर में कभी भी पूजा नही होती और आखिरी बार इस मंदिर में पूजा कब हुयी होगी इस बात का पता भी नहीं लग पाया है ! इस मंदिर को लेकर खूब रिसर्च किया गया लेकिन इस मंदिर के रहस्य के आगे वैज्ञानिको ने भी हार मान ली !

कुछ लोगो का मानना है कि इस कैलाश शिव मंदिर का निर्माण धरती पर नहीं बल्कि स्वर्ग में हुआ है जिसके बाद इसे धरती पर स्थापित कर दिया गया ! क्युकी इस मंदिर की कला और नक्काशी देख कर ही साफ़ पता चलता है कि इसे किसी मानव ने नहीं बनाया है ! दरअसल ये पूरा मंदिर केवल एक ही चट्टान पर बना हुआ है और चट्टान के इलावा और किसी भी चीज़का इस्तेमाल नहीं किया है ! चटटान पर बनी भव्य मुर्तिया और कला देखकर पता चलता है कि उस समय तो ऐसी कोई मशीने नहीं थी जिनसे इतनी बड़ी एक ही चट्टान को तराश कर ये मंदिर बनाया जाये ! इसलिए कुछ लोगो का मानना है कि ये मंदिर एलियंस के द्वारा बनाया गया है ! लेकिन अभी तक इस बात की भी पुष्टि नहीं हो पायी है !

इस कैलाश मंदिर के निर्माण में कही भी कोई ईंट,पत्थर,मिट्टी, गारा, रत्न किसी भी चीज़ का इस्तेमाल नहीं हुआ है आमतौर पर कोई भी मंदिर निचे से ऊपर की ओर बनाया जाता है लेकिन इस मंदिर की खासियत ये है कि इस मंदिर को ऊपर से निचे की ओर बनाया गया है ! इस मंदिर के निर्माण की कला ने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के वैज्ञानिको को हैरान कर दिया है ! ऐसा कैसे संभव हो सकता है कि बिना किसी जुड़ाव के कोई इमारत हज़ारो सालो से खड़ी रह सकती है !

कुछ लोगो का कहना है कि ये मंदिर 6000 साल पुराना है तो कुछ का कहना  है कि ये मंदिर  1900 साल पुराना है और इसे बनाने के लिए जरीर बोमास्त्र का पर्योग किया गया होगा ! क्यूंकि बोमास्त्र ही एक ऐसा अस्त्र है जिसमें ऐसी शक्ति होती है जो पत्थर को भी पिघाल सकती है ! इस भव्य मंदिर के अन्दर एक बालकनी भी बनायीं गयी है! मंदिर के बीच में कई पिलरो को जोड़ कर पुल का निर्माण भी किया गया है और मंदिर के निचे कई सारी सुरंग बनायी गयी है लेकिन ये सुंरग इतनी मायावी है कि वहां पहुच पाना हर किसी के लिए संभव नहीं है ! एक विदेशी व्यक्ति ने मंदिर के निचे एक सुरंग में अंतिम छोर तक पहुँच पाने का दावा किया है उस व्यक्ति ने वापिस आ कर बताया कि मंदिर के निचे एक विशाल कमरा है जहाँ उसने 7 व्यक्तियों को देखा है लेकिन वो बार बार अदृश्य हो जाते थे ! इस मंदिर के ऊपर दुनिया के कई वैज्ञानिक शोध कर चुके है लेकिन इसका रहस्य आज तक नहीं जान  पाए !

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