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डरा हुआ है मुख्तार,बोला फेल हो गया प्लान नही तो उस रात

दोस्तों सभी को अपनी जिन्दगी से प्यार होता है  हर कोई  सालो जीना जाता है लेकिन यदि किसी को पहले ही पता चल जाए कि उस के साथ कोई अनहोनी होने वाली है तो  डर सभी को लगता है चाहे वो कोई आम इंसान हो या कोई डॉन. जैसा कि सभी  को मालूम है हालही में माफिया मुख्तार अंसारी को लेकर खबर आई थी जिसमे उनके बेटे और मऊ सदर से विधायक अब्बास अंसारी ने उनके पिता के साथ अनहोनी होने की आशंका जताई थी .जिसके बाद इस मामले को लेकर एक और खबर सामने आ रही है .खबर के  मुताबिक माफिया मुख्तार अंसारी डर के साए में जी रहे है. अपने दर की वजह बताते हुए खुद  मुख्तार अंसारी ने कहा बोला फैल हो गया प्लान नही तो उस रात..पूरी खबर जानने के लिए खबर लो अंत तक जरुर पढ़े.

सुरक्षा में चूक और सुरक्षा न दिए जाने को मंडल कारागार में बंद माफिया मुख्तार अंसारी ने बड़ी साजिश बताया। मुलाकात के दौरान पुत्रों से कहा कि रविवार रात साजिश रचकर अगले दिन अधूरी सुरक्षा के बीच पेशी पर ले जाया गया लेकिन साजिश नाकाम हो गई। माफिया के पुत्र मऊ सदर से विधायक अब्बास अंसारी ने पुलिस के एक बड़े अधिकारी पर निशान साधते हुए आपत्तिजनक शब्द बोलने का आरोप लगाया।बांदा जेल में मुख्तार अंसारी से शुक्रवार को विधायक पुत्र अब्बास व छोटे पुत्र उमर ने मुलाकात की थी। दोनों सुबह करीब साढ़े दस बजे जेल परिसर में दाखिल हुए थे लेकिन उनकी मुलाकात करीब दोपहर डेढ़ से दो बजे तक हो सकी है। इस बीच मुख्तार के दोनों पुत्रों की आरटीपीसीआर रिपोर्ट व अन्य जांचें की गईं। मुलाकात के बाद बाहर निकले मऊ विधायक ने बताया कि पेशी पर ले जाने की स्थिति पर पिता से बात हुई है। जिसमें उन्होंने बताया कि जानबूझकर कमजोर सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें पेशी में ले जाया गया है।

उन्होंने पेशी पर जाने से इन्कार नहीं किया था लेकिन कोर्ट से सुरक्षा व्यवस्था के बीच पेशी में ले जाने के लिए कहा था। उन्होंने एक पुलिस अधिकारी से साथ में कम से कम एक सीओ व पीएसी की गारद भेजने की मांग की थी। इस पर उन्होंने आपत्तिजनक शब्द बोले थे। इतना ही नहीं उनका पहले वाला मेडिकल भी कैंसिल कर दिया गया था। मेडिकल कैंसिल किए जाने व दोबारा मेडिकल रात में कराने से बड़ी साजिश का आभास हुआ था लेकिन अधिकारियों की साजिश नाकाम हो गई। उधर पेशी पर ले जाते समय की गई सुरक्षा व्यवस्था के बारे में पुलिस व जेल के अधिकारियों ने बताया था कि सामान्य बंदी को ले जाने में जो सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए। उस हिसाब से कोई कमी नहीं की गई थी।

जांच को लेकर अधिकारियों की अटकी हैं सांसें :

 मुख्तार को पेशी में ले जाने की सूचना किसी अधिकारी या कर्मचारी के लीक करने की चर्चा है। इस पर डीजी जेल आनंद कुमार ने जांच के आदेश डीआइजी संजीव कुमार को दिए हैं। सात दिन में जांच रिपोर्ट मांगी गई है। गुरुवार को डीआइजी ने मंडल कारागार आकर 20 लोगों के बयान लिए थे। सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले गए थे ताकि पता चले कि जेल के अंदर की बात किसने लीक की। जिन लोगों के अभी तक बयान लिए गए हैं। उनकी सांसें कार्रवाई के डर से अटकी हैं।

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