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बच्चों में दिखें ये लक्षण तो हो जाएं सावधान, हो सकती है ये ख”तरनाक बीमारी

दोस्तों जब शरीर में प्रोटीन की कमी होने लगती है और यूरिन में प्रोटीन की अधिक मात्रा जाने लगती है तो इसे नेफ्रोटिक सिंड्रोम कहते है ! यह बीमारी किडनी से सम्बन्धित होती है जो ज्यादातर छोटे बच्चो में पाई जाती है !  समस्या बडो को भी हो सकती है लेकिन 2से 6साल के बच्चो में ही नेफ्रोटिक सिंड्रोम की समस्या पायी  जाती है ! नेफ्रोटिक सिंड्रोम की समस्या होने पर पैरो और टखनो पर सुजन आने लगती है और स्वास्थ्य के लिए खतरा बढ़ने लगता है !

नेफ्रोटिक सिंड्रोम क्या है 

किडनी का कार्य शरीर से दूषित पदार्थो को बहर निकालना है ! लेकिन किडनी की छननी के छेद बड़े हो जाने कारण आवश्यक तत्व और प्रोटीन शरीर से मूत्र के माध्यम से बहर निकलने लगते है ! जिसकी वजह से खून  में प्रोटीन की कमी , आँखों और पेट में सुजन होने लगती है ! इसके साथ ही कोलेस्ट्रोल बढ़ने लगता है ! इसमें किडनी की छोटी वाहिकाये जिनका काम फिल्टर करना है !वो खराब हो जाती है ! यदि नेफ्रोटिक सिंड्रोम का सही समय पर  इलाज नही  किया जाये तो इसका व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है !

नेफ्रोटिक सिंड्रोम के लक्षण 

नेफ्रोटिक सिंड्रोम की समस्या से पीड़ित व्यक्ति की आँखों ,पेट और चेहरे पर सूजन होने लगती है ! भूक कम लगने लगती है और ब्लड प्रेशर हाई होने लगता है !यदि इनमे से कोई भी लक्षण नजर आये तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए और समय पर इस बीमारी का ईलाज करवाना चाहिए ! इसके लिए कुछ टेस्ट की मदद भी ली जा सकती है !

यूरिन टेस्ट 

नेफ्रोटिक सिंड्रोम का पता लगाने के लिए पेशाब (Urine) का टेस्ट सबसे पहले आता है. जांच में यूरिन में प्रोटीन की सही मात्रा पता चल जाती है.

ब्लड टेस्ट 

खून का सैंपल लेकर रक्त में प्रोटीन की मात्रा का पता किया जाता है. साथ ही ट्राइग्लीसेराइड का भी पता लगाया जाता है.

किडनी बायोप्सी से जांच

बायोप्सी जांच के दौरान त्वचा (Skin) और किडनी में एक विशेष तरह की सुई डाली जाती है, जो किडनी के ऊतकों को बाहर निकलती है. इन्ही ऊतकों के छोटे-छोटे नमूने लैब में माइक्रोस्कोप के नीचे जांच के लिए रखे जाते हैं.

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