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पिता का सपना था बेटी बड़ा अफसर बने, बेटी 5वीं रैंक हासिल कर बनी IAS अधिकारी

दोस्तों हर किसी का सपना होता है कि वो पढ़ लिख कर कामयाब इंसान बने दुनियाभर में लोग उसे पहचाने वो सफलता के उस शिखर पर पहुँच जाये जंहा उसे देख कर उसके पिता को उस पर गर्व हो .ऐसा ही एक सपना है जो आज का हर युवा देखता है उस सपने का नाम है IAS अधिकारी . लेकिन IAS अधिकारी  बनना इतना आसान नही है इसके लिए यूपीएससी परीक्षा देनी पड़ती है जिसके लिए जी तोड़ मेहनत करनी पड़ती है . कठिन परीक्षा से गुजर कर परीक्षा पास करने के बाद ही IAS अधिकारी बन पाते है . ऐसा ही  एक  सपना हरियाणा की एक बेटी ने देखा था .अपनी बेटी का सपना पूरा करने के लिए प्राइवेट फैक्ट्री में काम करने वाले पिता ने जितनी मेहनत अपनी बेटी की IAS अधिकारी बनाने के  लिए की  बेटी ने भी दिन रात पढ़ कर यूपीएससी परीक्षा में अच्छी खासी रैंक हासिल कर अपने पिताकी मेहनत जाया नही होने दी .तो चलिए आपको बताते है हरियाणा की  बेटी ने अपनी मंजिल कैसे हासिल की .

कौन हैं (Mamta yadav ias) आईएएस ममता यादव

हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के एक गावं बसई की रहने वाली ममता यादव एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं. उनके पिता का नाम अशोक यादव है. वहीं, मां का नाम सरोज देवी है. पिता एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं. वहीं मां परिवार की जिम्मेदारियां संभालती हैं. ममता ऐसे जिले से ताल्लुक रखती हैं जहां महिलाओं की शिक्षा पर कम ध्यान दिया जाता है. इसके बावजूद भी उनके पिता ने बेटी की पढ़ाई के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी. ममता ने शुरुआती पढ़ाई गांव से ही पूरी की. इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वो दिल्ली चली गईं.ममता बचपन से ही पढ़ाई में काफी अच्छी थी. यही वजह थी कि उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में अच्छे नंबरों से सफलता हासिल की. उन्होंने इंटरमीडिएट की पढ़ाई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश से पूरी की. पढ़ाई में अच्छा होने के कारण उनका परिवार उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी के लिए शुरूआत से ही प्रोत्साहित करता रहता था. इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय के द हिंदू कॉलेज से पूरी की. वहां से भी ममता अपने कॉलेज की टॉपर रहीं. ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद वो पूरी तरह यूपीएससी परीक्षा की तैयारी में जुट गईं.

पहले प्रयास में यूपीएससी परीक्षा में हासिल की सफलता

यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के लिए उन्होंने सेल्फ स्टडी की. एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि सबसे पहले तो उन्होंने यूपीएससी परीक्षा का सिलेबस अच्छी तरह से समझ लिया फिर इसकी तैयारी के लिए किताबों और आर्टिकल्स को इकट्ठा किया. फिर पढ़ाई शुरू की. खुद को अपडेट रखने के लिए वो रोजाना अखबार पढ़ा करती थी. वहीं साप्ताहिक रिवीजन भी किया करती थी.सटीक रणनीति और मेहनत से पढ़ाई करने की वजह से उन्हें पहले ही प्रयास में सफलता हासिल हो गई. यूपीएससी परीक्षा में उन्होंने पहले प्रयास में 556वीं रैंक मिली. लेकिन कम रैंक आने के कारण वो पूरी तरह से खुश नहीं थी. हालांकि परीक्षा में पास करने के बाद उन्होंने भारतीय रेलवे कार्मिक सेवा में ट्रेनिंग करने का फैसला कर लिया.

5वीं रैंक हासिल कर यूपीएससी परीक्षा में बनी टॉपर

अपने पहले प्रयास में रैंक कम आने की वजह से ममता अपने बचपन के सपनों को पूरा नहीं कर सकती थी. उनका आईएएस अधिकारी बनने का सपना अधूरा रह जा रहा था. इसलिए उन्होंने फिर से यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया. यूपीएससी 2020 की परीक्षा में उन्होंने 5वीं रैंक हासिल की.मेहनत और लगन की बदौलत उन्होंने आईएएस अधिकारी बनने की रैंक हासिल कर ली. उनकी इस सफलता से ना सिर्फ उनके परिवार में खुशी छा गई बल्कि पूरे गांव में जश्न का माहौल हो गया है. ममता यादव गांव की पहली ऐसी लड़की हैं जिन्हें आईएएस अधिकारी बनने का मौका मिलेगा. वो अपने गांव की लड़कियों के लिए एक प्रेरणा बनकर सामने आईं हैं.

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