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युक्रेन में भयानक मंजर देख कर लौटी छात्रा ने बयां किया दर्द, यकीन नहीं होता ज़िंदा लौट आई, एक वक्त खाना खाकर किया गुजारा

दोस्तों युक्रेन में फंसे हुए छात्रों में से कुछ छात्र वापिस भारत अपने घर लौट आये है . भारत की जमीन पर कदम रखते ही उन्होंने अपने आपको सुरक्षित महसूस किया और चैन की सांस ली लेकिन अबभी भी उनकी आँखों के सामने से वो भयानक मंजर नही जाता जो वो युक्रेन में देख कर आये है अभी भी बम के धमाके उनके कानो में गूंजते है वंहा के तबाही वाले दृश्य उनकी आँखों में घूमते है .युक्रेन से लौटी एक छात्रा ने अपनी आपबीती ब्यान की कि उन्हें युक्रेन में कैसे कैसे हालातो का सामना करना पडा .उसे तो अभी तक यकीन नही हो पा  रहा है कि वो जिन्दा कैसे लौट आई .

यूक्रेन  में फैले खौफ दहशत और वहां हो रही बमबारी के भयानक मंजर से निकलकर यूपी के हाथरस जिले के सादाबाद पहुंची मेडिकल एमबीबीएसकी छात्रा शिवानी अब अपनों के बीच पहुंच चुकी है. यूक्रेन से निकलकर अपनों के बीच पहुंची शिवानी ने वहां के हालातों और भयावक मंजर को लेकर अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि यूक्रेन में मौत के मुंह से निकल कर वह वतन लौटी है. चारों तरफ बम के धमाके हो रहे थे. हालात बद से बदतर होते चले जा रहे हैं. ऐसे में एक वक्त की रोटी खाकर वहां समय काटा गया. शिवानी ने कहा उसको यकीन नहीं होता है कि वो यूक्रेन से जिंदा अपने वतन वापस लौट आई है.अपनों से दूर जिंदगी को कामयाब बनाने के लिए एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए भारतीय छात्र और छात्राएं यूक्रेन गए थे, लेकिन यूक्रेन में युद्ध और धमाकों के बीच वहां फंसे भारतीय छात्र छात्राओं का एक-एक पल दहशत में कट रहा है, क्योंकि यूक्रेन में इमरजेंसी की घोषणा के बाद से ही वहां के हालात लगातार बिगड रहे हैं.

जिंदा घर वापस आ गई उसे यकीन नहीं हो रहा’

शिवानी गुप्ता का कहना हैं कि हम लोग भले ही पश्चिमी यूक्रेन के उजहोरोड शहर में थे, लेकिन वहां भी डर कम नहीं था, क्योंकि यूक्रेन में हर तरफ भगदड़ का माहौल है. जो मंजर यूक्रेन में रहकर उसने अपनी आंखों से देखा वह डरावना था. शिवानी ने कहा वो यूक्रेन से अपने घर जिंदा लौट आई हूं, इसका उसे यकीन ही नहीं हो रहा है. शिवानी ने कहा वो यूक्रेन से वापस लौट आई है इसके लिए भारत सरकार का बहुत-बहुत धन्यवाद देती है.

एटीएम से कैश निकालना भी हो गया था मुश्किल

उन्होंने कहा यूक्रेन में 24 फरवरी को इमरजेंसी की घोषणा हो गई थी. इमरजेंसी की घोषणा के बाद उनकी यूनिवर्सिटी टीम ने छात्रों को अपने खाने पीने का प्रबंध करने की चेतावनी दे दी थी. यूनिवर्सिटी टीम की तरफ से खाने पीने की चेतावनी मिलने के बाद हर कोई घबरा गया था. जिसके चलते इतने कम समय में खाने पीने की व्यवस्था भी ढंग से नहीं हो सकी थी. इसके साथ ही साइबर अटैक भी हो गया था. जिसके बाद एटीएम से कैश निकालना मुश्किल हो गया. जैसे तैसे करके पैसा निकाल सके हैं. फिर कीव तक रूसी सेना पहुंच गई थी. रूसी सेना द्वारा मिसाइलों से किए जा रहे हमले के वीडियो देखकर लग रहा था मानो अब कभी जिंदा अपने घर नहीं लौट पाऊंगी.

तिरंगे का सम्मान होता देख मन काफी खुश हुआ

हालांकि उजहोरोड शहर से हंगरी बार्डर केवल पांच किलोमीटर था. उसके बाद भारतीय छात्र छात्राओं को दूतावास से जो निर्देश मिले उसके साथ ही रविवार को सुबह सात बजे वहां पर जगह खाली करते हुए छात्र हंगरी बार्डर के लिए निकल पड़े. इसके बाद वीजा पासपोर्ट और संबंधिति कागजी कार्यवाही में वहां पर छह-सात घंटे लगे. उसके बाद शाम को 7 बजे भारतीय छात्र हंगरी बार्डर पहुंचे. हंगरी बार्डर पहुंचने के बाद वहां से बस में बैठकर एयरपोर्ट पहुंचे. इस दौरान हमारी बस पर तिरंगा झंडा लगा था. बस में लगे भारतीय झंडे का सम्मान काफी देखने को मिला. इसके बाद वहां के अधिकारियों ने खाना पीना भी दिया.

इस दौरान साथ में मौजूद सभी भारतीय छात्र छात्राएं की आंखें भारतीय फ्लाइट को देखने को तरस रही थीं. कुछ घंटे बाद हमारी फ्लाइट पहुंच गई. फिर एयरपोर्ट पर फ्लाइट पहुंचते हैं कुछ मिनटों में फ्लाइट में बैठ गए और एयरपोर्ट से फ्लाइट ने उड़ान भरी तो सबकी जान में जान आई. जिसके कुछ घंटों के बाद यूक्रेन की जमीन से अपने पैर उठाने के बाद कुछ घंटों बाद फ्लाइट जैसे ही दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड हुई और अपने वतन की जमीन पर पैर रखा तब उसको एहसास हुआ कि अब घर दूर नहीं है. शिवानी ने कहा जब वो एयरपोर्ट से बाहर निकली तो उसने देखा कि मां ममता गुप्ता और पापा दिनेश गुप्ता एयरपोर्ट के बाहर खड़े थे. परिवार को देख शिवानी खुद को रोक नहीं पाई और उनसे लिपटक बहुत रोई

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