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रिटायर होने के बाद भी मिलती है ये सुविधाएं एक IAS अधिकारी को

आईएएस पेपर की तैयारी सबसे कठिन परीक्षाओं में मानी जाती है जो कि आज  के बच्चो में बहुत सी महेनत के ऊपर होती  है इस कि तैयारी के लिए काम से कम 1से 2 वर्ष की तैयारी का समय लगता है और आईएएस में मुख्य पेपर में कुल 9 पेपर होते है  और अगर आप चाहे तो ग्रेजुएसन करने के साथ ही इसकी तैयारी कर सकते है और इस कि कोचिग भी बहुत सा पैसे लगता है और आईएएस के लोए क्वालिफिकेशन के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त विश्यविद्यालय से स्नातक डिग्री होनी चाइयेसिविल सेवा के लिए फ्रॉम भरते समय बैचलर डिग्री प्राप्त होने का प्रमाण देना होगा

 

IAS अधिकारियों को आजीवन पेंशन की सुविधा मिलती है 1 जनवरी 2004 से सभी सरकारी कर्मचारियों (सशस्त्र बलों को छोड़कर) के लिए पेंशन सुविधा फिर से शुरू कर दी गई है। इसलिए, 1 जनवरी 2004 के बाद शामिल होने वाले IAS अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों को पेंशन के लिए अपने वेतन का 10% योगदान करना होता है जबकि सरकार इसमें 14% योगदान जोड़ती है।

सेवानिवृत्ति के बाद कुछ आईएएस अधिकारी भी कुछ क्षेत्रों में सरकार द्वारा नियोजित भी किया जाता है। इन्हें राज्यपाल, उपराज्यपाल, सीएजी, सीईसी, यूपीएससी, सीआईसी के पद के लिए विभिन्न आयोगों, न्यायाधिकरणों, सार्वजनिक क्षेत्र के बोर्डों, मुख्य वफ़ादारी मॉनिटर्स के पद पर नियुक्त किया जा सकता है। हालांकि यह एक IAS अधिकारी की अपनी रूचि पर निर्भर करता है की वह रिटायरमेंट के बाद किसी पद पर काम करना चाहते है या नहीं।

एक IAS अधिकारी का काम जोखिम भरा होता है और ऐसी में अक्सर उनके कई दुश्मन बन जाते हैं। वैसे तो रिटायरमेंट के बाद किसी भी IAS अधिकारी को गार्ड और सिक्योरिटी की सुविधा नहीं मिलती है लेकिन अगर उन्हें खतरा महसूस हो तो वह सरकार से सिक्योरिटी की मांग कर सकते हैं। ऐसे में यह सरकार का फ़र्ज़ होता है कि वह एक पूर्व सिविल सेवक की रक्षा के लिए ज़रूरी कदम उठाए।

इस सब के अलावा एक रिटायर्ड IAS अधिकारी का रुतबा और इज़्ज़त बरक़रार रहती है। देश की प्रगति में दिए गए उनके योगदान के लिए सरकार हमेशा ही एक IAS अधिकारी को सम्मान देती है।

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