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प्लेन से भी ज्यादा किराया वसूल रहे है बस वाले, लोग 10-10 हजार रुपए देकर जा रहे परदेस कमाने

संकट के इस काल में महंगाई भी आसमान छु रही है ! बस वालो ने भी प्लेन से ज्यादा किराया वसूलना शुरू कर दिया है ! कह रहे है  डबल सीट के लिए 10-10 हजार रुपए देकर जा रहे परदेस कमाने- प्लेन से अधिक किराया ले रहे बस वाले, फिर भी नहीं मिलती सीट, अनलॉक के साथ फिर पलायन;

मुजफ्फरपुर में यात्रियों की भीड़ देख बस संचालक लेते मनमाना किराया :

बिहार समेत कई राज्याें में अनलाॅक के साथ ही पलायन भी शुरू हो गया है। इसका फायदा स्थानीय बस संचालक उठाने लगे हैं और मनमाना किराया वसूलने लगे हैं। उदाहरण के लिए पटना से दिल्ली का जितना किराया हवाई जहाज का है उससे दोगुना बस संचालक वसूल रहे हैं। बस की एक सीट की दिल्ली के लिए अमताैर पर 2 हजार से 2500 रुपए किराया लगता है, लेकिन इस समय 5-5 हजार रुपए लिए जा रहे हैं। इसके बावजूद भीड़ इतनी बढ़ गई है कि स्टैंडाें से सैकड़ाें लाेगाें काे निराश लाैटना पड़ रहा है।

खासकर बुधवार को जो तस्वीरें सामने आईं, वह चाैंकानेवाली थीं। बैरिया बस स्टैंड के बदले चांदनी चौक से सदातपुर, मोतीपुर से दिल्ली, लुधियाना, भोपाल तक की 38 बसें खुलीं। दाेगुना से अधिक किराया लेने के बावजूद सबकी सीटें फुल हाे गईं और एक हजार से अधिक लाेगाें काे लाैटना पड़ा। इन यात्रियाें ने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है कि मजदूरी के लिए भी पूंजी लगानी पड़ रही है। ऐसे ताे ट्रेन में 500 रुपए खर्च कर पहुंच जाते थे। लेकिन, ये काेराेना का असर है कि 5-5 हजार देने पड़ रहे हैं। बता दें कि अनलाॅक की सूचना मिलते ही बस व ट्रेन से हजाराें लोग राेजी-राेजगार के लिए प्रतिदिन दिल्ली, अमृतसर, लुधियाना, चंडीगढ़, पानीपत, सोनीपत, मुंबई, भाेपाल जाने लगे हैं।

मूक दर्शक बना प्रशासन और परिवहन विभाग |बस संचालकों द्वारा मनमाना किराया वसूले जाने के बाद भी जिला प्रशासन व परिवहन विभाग मूकदर्शक बना हुआ है। सरकार के आदेश के बावजूद परिवहन विभाग के अधिकारी बस संचालकों पर हाथ डालना नहीं चाहते हैं। परिवहन आयुक्त आधा दर्जन से अधिक बार जिला परिवहन व क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी को पत्र भेज अवैध रूप से दिल्ली व अन्य जगहाें के लिए खुलने वाली बसों को जब्त व जुर्माना करने का निर्देश दे चुके हैं।
एक बस का टिकट लिए मीनापुर के सतीश कुमार, रामदयाल सिंह, हीरा महतो, तपस्या यादव आदि ने कहा कि डबल सीट के 10 हजार देकर जा रहे हैं।

काफी दिनाें से जब बैठे रहे और यहां काेई राेजगार नहीं मिला ताे सेठ के बुलावे पर जा रहे। इन लाेगाें ने टिकट दिखाते हुए कहा कि कोरोना की दाेनाें लहराें ने उन सबकाे आर्थिक रूप से बर्बाद कर दिया है। वहां जाने पर सेठ भले किराए के रुपए दे दें, लेकिन अभी ताे उधार लेकर जा रहे हैं।

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