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पैर के अंगूठे में काला धागा बाँधने से ये बीमारी होती है जड़ से खत्म

दोस्तों शरीर के बाकि अंगो की तरह नाभि शरीर का एक अंग है ! नाभि को शरीर का केंद्र माना जाता है ! नाभि शरीर की बहत्तर हजार नाड़ियो से जुडी होती है ! यदि नाभि अपने स्थान से खिसक जाती है तो शरीर में पेट दर्द के साथ और भी बहुत सी समस्या होने लगती है ! नाभि खिसकने की समस्या किसी भी दवा से ठीक नही होती ! इस समस्या से तभी निजात मिलती है जब नाभि को फिरसे उसके स्थान पर लाया जाता है ! चिकत्सा पद्दति में इसे नही मानती लेकिन इस पद्दति से आज भी हजारो लोग इस समस्या से निजात पाते है !

नाभि के अपने स्थान से खिसक जाने को बहुत से नामो से जाना जाता है जैसे नाभि हटना , धरण जाना या गिरना ,गोला खिसकना,नाप चढना ,पिचोटी खिसकना ,नाभि पलटना या नाभि चढना आदि ! नाभि के अपने स्थान से खिसकने पर पेट दर्द ,कब्ज ,दस्त और अपच जैसी समस्या होने लगती है ! यदि नाभि को समय पर उसके स्थान पर नही लाया जाता है तो बहुत सी परेशानिया होने लगती है जैसे दांत ,बाल और आँखों पर इसका प्रभाव पड़ने लगता है और मानसिक समस्या हो सकती है जिससे डिप्रेशन का शिकार हो सकते है ! इसलिए नाभि का अपने स्थान पर जल्दी आना बहुत जरूरी है !

आजकल के व्यस्त और भागमभाग वाली जिन्दगी में चलते -फिरते काम करते समय पता नही चलता कब कैसे पांव पड  जाये और नाभि अपने स्थान से ऊपर -नीचे या दांये -बांये खिसक जाये ! आजकल के भागमभाग वाले जीवन में ये लोगो की आम, समस्या बनी हुयी है ! तनाव-दबाव भरे प्रतिस्पर्धापूर्ण वातावरण में काम करते रहने से व्यक्ति का नाभि-चक्र निरंतर क्षुब्ध बना रहता है ! नाभि के अपने स्थान से हटने से पेट दर्द ,पेचिस-पतले दस्त ,पेट आम जाना पेट फूलना-अरूचि-हरारत आदि होता है ! यदि समय पर इसे  नही किया जाता है तो हमेशा के लिए अपनी जगह बना लेती है  ! नाभि पुरुषो में बायीं तरफ और स्त्रियों में दायी ओर टला करती है !

योग में  बहत्तर हजार से ज्यादा नाड़ियों की संख्या बताई गई है और इसका मूल उदगम स्त्रोत नाभि स्थान है कई बार नाभि के टल जाने पर भी कब्ज की शिकायत हो जाती है और जब तक नाभि टली है तब तक कब्ज ठीक नहीं हो सकता है अत:इसके लिए हमें सबसे पहले अपनी नाभि की जांच करवा लेनी चाहिए अगर नाभि स्पंदन केंद्र  से खिसक गई है तो उसे नाभि टलना (Navel sidestep) कहते हैं इसके सही जगह में आते ही कब्ज की परेशानी दूर हो जाती है ! नाभि के खिसकने से उदर विकार के अलावा व्यक्ति के दाँतों, नेत्रों व बालों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगता है और दाँतों की स्वाभाविक चमक कम होने लगती है तथा यदाकदा दाँतों में पीड़ा होने लगती है और नेत्रों की सुंदरता व ज्योति क्षीण होने लगती है-बाल असमय सफेद होने लगते हैं-आलस्य, थकान, चिड़चिड़ाहट, काम में मन न लगना, दुश्चिंता, निराशा, अकारण भय जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों की उपस्थिति नाभि चक्र की अव्यवस्था की उपज होती है।हमारे आयुर्वेद व प्राकृतिक उपचार चिकित्सा पद्धतियों में नाभि स्पंदन से रोग की पहचान का उल्लेख हमें मिल जाता है ! यदि नाभि का स्पंदन ऊपर की तरफ चल रहा है यानि छाती की तरफ तो अग्न्याशाय खराब होने लगता है इससे फेफड़ों पर गलत प्रभाव होता है और मधुमेह, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियाँ होने लगती हैं !

नाभि खिसकने का कारण :

यदि किसी के पेट की मांसपेशियां कमजोर होती है तो नाभि खिसकने की समस्या ज्यादा होती है ! दैनिक जीवन के कार्य करते समय शरीर का संतुलन  सही नहीं रह पाने के कारण या भारी सामान उठाने के कारण नाभि खिसक सकती है ! यदि  शरीर की मांस पेशियों पर एक तरफ अधिक भार पड़ जाये तो  भी धरण चली जाती है ! यदि  पेट पर बाहरी या अंदरूनी दबाव पड़े तो ये नाभि टलने का कारण हो सकता है !

सामान्य कारण इस प्रकार है :

  • असावधानी से दाएं या बाएं झुकना !
  • संतुलित हुए बिना अचानक एक हाथ से वजन उठाना!
  • चलते हुए अचानक ऊंची नीची जगह पर पैर पड़ना!
  • खेलते समय गलत तरीके से उछलना !
  • तेजी से सीढ़ी चढ़ना या उतरना !
  • ऊंचाई से छलांग लगाना !
  • पेट में अधिक गैस बनना !
  • पेट में किसी प्रकार की चोट लगना !
  • स्कूटर या मोटर साइकिल चलाते समय झटका लगना !
  • गर्भावस्था में पेट पर आतंरिक दबाव  !
  • तनाव !
  • बचपन से किसी कारण से नाभि खिसकी हुई हो !

नाभि खिसकने की जाँच 

यदि किसी की नाभि खिसक गयी है तो बहुत ही आसानी से इसका पता लगाया जा सकता है ! इसकी जानकारी होने पर आपको भी  नाभि खिसकने पर पता चल जायेगा !अधिकतर पुरुष की नाभि बायीं तरफ तथा स्त्रियों की नाभि दायीं तरफ खिसकती है !

नाभी के खिसकने का पता करने की विधि इस प्रकार है 

1. इसके लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएँ ! अपने दोनों हाथ -पैर  पास में सीधे रखें ! हथेलियां खुली रखकर इस तरह समानांतर रखें की दोनों छोटी अंगुलीयां (Little Finger ) पास में रहें ! हथेली की रेखा मिलाते हुए छोटी अंगुली (Little Finger) की लंबाई चेक करें ! यदि छोटी अंगुलियां की लंबाई में फर्क नजर आता है यानि कनिष्ठा अंगुलियां छोटी बड़ी नजर आती है तो नाभि खिसकी हुई है !

2. पुरुष की नाभि चेक करने के लिए एक धागे से उसकी नाभि और एक छाती के केन्द्रक के बीच की दूरी नापें !  अब नाभि से दूसरी छाती के केन्द्रक की दूरी नापें ! यदि नाप अलग अलग आती है तो नाभि खिसकी हुई है !

3. सुबह के समय खाली पेट चटाई पर पीठ के बल लेट जाये ! अपने हाथो और पैरो को सीधा रखे ! अपनी हथेलियों को जमीन की ओर मोड़ ले ! अब सम्पदन चेक करने के लिए अंगूठे से नाभि पर दबाब बनाये ! यदि आपको नाभि पर  सम्पदन महसूस होता है तो नाभि बिल्कुल ठीक है ! यदि स्पंदन नाभि के स्थान पर ना होकर नाभि से ऊपर, नीचे, दाएं या बाएं महसूस होता है तो नाभि अपने स्थान से खिसकी हुई है !

4.  पीठ के बल लेट जाएँ ! दोनों पैर पास में लाएं यदि पैर के अंगूठे ऊपर नीचे दिखाई दें तो नाभि अपने स्थान से हटी हुई है !

नाभि खिसकने से नुकसान 

.यदि नाभि नीचे की ओर खिसक गई है तो दस्त , अतिसार , पेचिश आदि की समस्या हो जाती है !

.नाभि के ऊपर की तरफ खिसकने पर कब्ज रहने लगती है और  गैस अधिक बनती है ! इसके कारण लंबी अवधि में फेफड़ों की समस्या, अस्थमा, डायबिटीज आदि बीमारियां हो सकती है !

.नाभि के बाईं और खिसकने पर सर्दी , जुकाम , खाँसी , कफ आदि की समस्या बार बार हो सकती है !

. नाभि के दायीं तरफ खिसकने पर लीवर पर असर पड़ सकता है जिससे  एसिडिटी , अपच या अफारा हो सकते है !

.यदि नाभि अधिक गहराई में महसूस हो तो व्यक्ति कितना भी खाये शरीर कृशकाय ही बना रहता है !

नाभि को ठीक करने के उपाय 

नाभि खिसकने पर कुछ लोग खुद का पेट तेल लगा कर मसल कर नाभि सही करने का प्रयास करते है ,जो उचित तरीका नहीं है !  पेट को मसलना नहीं चाहिए ! नाभि ठीक करने के लिए जो भी उपाय बताये  गए है उनमे से अपनी शारीरिक अवस्था के अनुसार नाभि को वापस अपनी जगह ला सकते है ! पैर के अंगूठे में काला धागा बांधने से नाभि बार बार नहीं खिसकती है !  इस उपाय से आपकी नाभि भविष्य में नही खिसकेगी !

जिस हाथ की छोटी अंगुली की लंबाई कम हो उस हाथ को सीधा करें और हथेली को ऊपर की तरफ रखे  !अब इस हाथ को दुसरे हाथ से कोहनी के जोड़ के पास से पकड़ें ! अब पहले वाले हाथ की मुट्ठी कस कर बंद कर ले ! इस मुट्ठी से झटके से अपने इसी तरफ वाले कंधे पर मारने की कोशिश करें ! कोहनी को थोडा  ऊंचा  रखें ऐसा आपको  दस बार करन है  ! अब आपको  अंगुलियों की लंबाई को  फिर से चेक करना है ! अब दोनों  अंगुलियों की लंबाई का फर्क मिट गया होगा यानि नाभि अपने स्थान पर आ गई है ! यदि ऐसा नहीं होता है तो एक बार फिर से यही क्रिया दोहराएं !

सुबह खाली पेट सीधे पीठ के बल चटाई  पर लेट जाएँ ! दोनों पैर पास में हो और सीधे हो ! हाथ सीधे हो और कलाई जमीन की तरफ हो ! अब धीरे धीरे दोनों पैर एक साथ ऊपर  45° तक ऊँचे करें ! फिर धीरे धीरे नीचे ले आएं ऐसा आप तीन बार करें !  ऐसा करने पर नाभि सही स्थान पर आ जाएगी !  यह उत्तानपादासन कहलाता है !

नाभि खिसक जाने पर व्यक्ति को मूँगदाल की खिचड़ी के सिवाय कुछ न दें तथा दिन में एक-दो बार अदरक का 2 से 5 मिलिलीटर रस पिलाने से लाभ होता है !

दो चम्मच पिसी सौंफ, ग़ुड में मिलाकर एक सप्ताह तक रोज खाने से नाभि का अपनी जगह से खिसकना रुक जाता है !

इसके अलावा उत्तानपादासन, मत्स्यासन, धनुरासन व चक्रासन भी नाभि सेट करने में कारगर होते हैं !

कमर के बल लेटकर पेट की मालिश भी की जा सकती है इसके लिए सरसों का तेल लेकर पेट पर लगाएं और नाभि स्पंदन जो ऊपर या साइड में सरक गया है उस पर अंगूठे से दबाव डालते हुए नाभि केंद में लाने का प्रयास करे !

मरीज को सीधा (चित्त) सुलाकर उसकी नाभि के चारों ओर सूखे आँवले का आटा बनाकर उसमें अदरक का रस मिलाकर बाँध दें एवं उसे दो घण्टे चित्त ही सुलाकर रखें आपके दिन में दो बार यह प्रयोग करने से नाभि अपने स्थान पर आ जाती है तथा दस्त आदि उपद्रव शांत हो जाते हैं !

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