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औरंगज़ेब लेन का नाम सीडीएस बिपिन रावत के नाम पर हो, PM को ट्वीट पर उठी मांग

दोस्तों भारत के पहले  सीडीएस बिपिन रावत 16 दिसम्बर 1978 को 11 गोरखा राइफल्स की 5 वी बटालियन में कर्नल के पद पर नियुक्त किये गये थे . इसके बाद उन्हें ब्रिगेडियर के पद पर प्रमोट किया गया था . भारत सरकार द्वारा विपिन रावत को  17 दिसम्बर 2016 को  27वे सेनाध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया . विपिन रावत ने भारतीय सेना के चीफ ऑफ़ स्टाफ कमेटी के 57 वे अध्यक्ष के पद पर भी कार्य किया है .लेकिन दुःख की बात है कुन्नूर जाते समय  हेलिकॉप्टर दुर्घटना में सीडीएस बिपिन रावत इस दुनिया को हमेशा के लिए छोड़ गये .

दरअसल  सीडीएस बिपिन रावत दिल्ली से तमिलनाडु जा रहे थे। वहां पर उनको एक आर्मी स्कूल (Army School) में लेक्चर देना था। सीडीएस बिपिन रावत को पूरे सैन्य सम्मान के साथ आखरी विदा ई दी गई। सीडीएस बिपिन रावत को लेकर जेएनयू के प्रोफेसर (JNU Professor) और वरिष्ठ बुद्धिजीवी आनंद रंगनाथन (Anand Ranganathan) ने एक महत्वपूर्ण बात कही है। आइए आपको पूरी ख़बर विस्तार से बताते है

जेएनयू के प्रोफेसर ने प्रधानमंत्री को ट्वीट कर लिखा

शनिवार को जेएनयू के प्रोफेसर और लेखक आनंद रंगनाथन (Anand Ranganathan) ने एक ट्वीट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से एक महत्वपूर्ण माँ ग की है। उस बात के लिए जनता भी उनके साथ है। दिल्ली में स्थित औरंगज़ेब लेन (Aurangzeb Lane) को जनरल बिपिन रावत (CDS Bipin Rawat) के नाम पर रखने का अनुरोध करते हुए ट्वीट किया। दिल्ली के मध्य में आज भी एक औरंगज़ेब लेन मौजूद है। औरंगज़ेब के काले इतिहास के बारे में तो हम सब जानते है।

औरंगज़ेब लेन का नाम सीडीएस बिपिन रावत के नाम पर हो

आपको बता दें कि लोगों ने लिखा कि सभी सड़कें हमारे उन नायकों के नाम पर होनी चाहिए। जो भविष्य के लोगों के लिए अपने संदेश छो ड़कर गए हैं। इसके साथ ही एक व्यक्ति लिखता है कि यहाँ तो केवल एक सड़क की बात है। लेकिन हमारे देश में महाराष्ट्र (Maharashtra) और बिहार (Bihar) में औरंगाबाद (Aurangabad) नाम से दो शहर है। शिवसेना (Shiv Sena) इसे 90 के दशक से ही संभाजीनगर (Sambhaji Nagar) नाम से बुला रही है लेकिन अब तक इसका नाम बदलने की कोशिश नहीं की। एक व्यक्ति ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को टैग करते हुए यह भी लिखा कि बिहार (Bihar) में भी बख्तियारपुर जंक्शन है। इसका नाम भी बदला जाए।

बचपन से था फौज से लगाव

सीडीएस बिपिन रावत भारतीय सेना के सबसे श क्तिशाली अधिकारी थे। इसलिए उनको सैन्य सम्मान के साथ 21 तोपो की सलामी दी थी। सीडीएस बिपिन रावत थल सेना अध्यक्ष भी रहे है। वह अपने काम के प्रति काफी मेहनती थे। सीडीएस बिपिन रावत ने अपनी पूरी जिंदगी भारतीय सेना के नाम कर दी थी। आपको बता दे कि सीडीएस बिपिन रावत का फौज से लगाव बचपन से ही था क्योंकि उनके पिता भारतीय सेना में अफसर थे।

 

 

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