free tracking
Breaking News
Home / जरा हटके / इंडिया गेट पर 50 सालो से कैसे जल रही थी अमर जवान ज्योति,5 बाते जो हर देशवासी को पता होनी चाहिए

इंडिया गेट पर 50 सालो से कैसे जल रही थी अमर जवान ज्योति,5 बाते जो हर देशवासी को पता होनी चाहिए

दोस्तों आप दिल्ली में बने  42 मीटर ऊँचे इण्डिया गेट के बारे में तो जानते ही होंगे ! दूर दूर से लोग इंडिया गेट घुमने के लिए आते रहते है आपको बता दें कि इडिया गेट शहीद सैनिको की याद में बनाया गया है जो पूरी दुनिया में मशहूर है ! इंडिया गेट दिल्ली का सबसे पुराना वॉर मेमोरियल है जिसे अंग्रेजों ने 1921 में  ग्रे उन भारतीय सैनिकों की याद में बनवाया था जो पहले विश्‍व युद्ध और तीसरे एंग्‍लो-अफ्रीकन युद्ध में शहीद हुए थे। 1971 में भारत-पाकिस्‍तान युद्ध के बाद से, इंडिया गेट के नीचे एक ज्‍योति जल रही है। यह अमर ज्‍योति हर उस सैनिक को सलाम करती है जिसने भारत के लिए अपनी जान कुर्बान की। इसे ‘अमर जवान ज्‍योति’ नाम दिया गया

 

रिटायर्ड सैनिकों से जानें, फैसला सही या गलत?

पिछले 50 साल से लगातार जल रही अमर जवान ज्‍योति आज (21 जनवरी 2022) बुझा दी जाएगी। इसका विलय राष्‍ट्रीय युद्ध स्‍मारक स्थित अमर जवान ज्‍योति में कर दिया जाएगा। इसी के साथ 50 साल का एक ऐतिहासिक सफर खत्‍म हो जाएगा। आइए आपको बताते हैं इंडिया गेट स्थित अमर जवान ज्‍योति के बारे में 5 खास बातें जो अब शायद इतिहास का हिस्‍सा हो जाएंगी।

कभी इण्डिया गेट पर बस चलती थी गाड़ियाँ

राजपथ पर वॉर मेमोरियल के रूप में इंडिया गेट बनवाया गया था। इसे सर एडविन लुटयंस ने डिजाइन किया था। 1972 में यहां पर अमर जवान ज्‍योति की स्‍थापना से पहले गाड़‍ियां गुजरा करती थीं। कोलंबिया यूनिविर्सिटी के आर्काइव में मौजूद 1930 के दशक की तस्‍वीर में आप इंडिया गेट से गुजरती कारें देख सकते हैं।

अमर जवान ज्‍योति पर हर साल लगता रहा मेला

‘शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले…’ जगदंबा प्रसाद मिश्र ‘हितैषी’ की यह कविता अमर जवान ज्‍योति पर एकदम सटीक बैठती है। 1971 युद्ध के बाद इंडिया गेट के नीचे अमर जवान ज्‍योति स्‍थापित करने का फैसला हुआ। 26 जनवरी 1972 को तत्‍कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसका उद्घाटन किया। तब से अमर जवान ज्‍योति लगातार जलती आ रही है। हर साल राष्‍ट्रीय उत्‍सवों पर शहीदों को नमन करने कृतज्ञ देशवासी जमा होते हैं। ऊपर की तस्‍वीर 15 दिसंबर 1972 की है जब 1971 युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की विधवाएं उन्‍हें श्रद्धांजलि देने पहुंची थीं।

कैसे हमेशा जलती रही अमर जवान ज्‍योति?

>अमर जवान ज्‍योति हमेशा जलती रहती है। फलक के चारों तरफ चार कलश रखे हैं जिनकी लौ कभी नहीं बुझती। यह बात अलग है कि केवल एक कलश की ज्‍योति ही सालभर जलती है। हर साल गणतंत्र दिवस और स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर चारों कलश की ज्‍योति प्रज्‍जवलित की जाती है। साल 2006 तक इन्‍हें जलाए रखने के लिए लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) का यूज किया जाता था। उसके बाद से अमर जवान ज्‍योति को जलाए रखने की खातिर पाइप्‍ड नैचरल गैस (PNG) यूज होने लगी। इंद्रप्रस्‍थ गैस लिमिटेड (IGL) पीएनजी सप्‍लाई करती है। LPG से PNG पर जाने का फैसला इसलिए हुआ क्‍योंकि यह सेफ भी है और सस्‍ती भी।

खास पाइपलाइन बिछी है, हर ज्‍योति के लिए अलग बर्नर

अमर ज्‍योति जवान को PNG से प्रज्‍जवलित रखने के लिए कस्‍तूरबा गांधी मार्ग से लेकर ज्‍योति तक करीब आधा किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई थी। हर ज्‍योति को जलाने के लिए एक अलग बर्नर दिया गया है। जब इसे एलपीजी से जलाया जाता था, तब एक सिलिंडर में डेढ़ दिन तक ज्‍योति जला करती थी। सिलिंडर्स को मेमोरियल के रूफटॉप पर रखा जाता था। अमर जवान ज्‍योति की सुरक्षा में हमेशा सैनिक तैनात रहते हैं। चौबीसों घंटे सेना, वायुसेना और नौसेना के जवान इसकी रक्षा करते हैं। तीनों सेनाओं के ध्‍वज भी ज्‍योति के पास मौजूद रहते हैं। विजय दिवस पर तीनों सेनाओं के प्रमुख यहां माल्‍यार्पण करते हैं।

हमेशा सुरक्षा घेरे में रहती है अमर जवान ज्‍योति

अमर जवान ज्‍योति की सुरक्षा में हमेशा सैनिक तैनात रहते हैं। चौबीसों घंटे सेना, वायुसेना और नौसेना के जवान इसकी रक्षा करते हैं। तीनों सेनाओं के ध्‍वज भी ज्‍योति के पास मौजूद रहते हैं। विजय दिवस पर तीनों सेनाओं के प्रमुख यहां माल्‍यार्पण करते हैं।

रिटायर्ड रक्षा कर्मचारी करते हैं अमर जवान ज्‍योति की देखरेख

About admin1

Leave a Reply

Your email address will not be published.