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अजय देवगन के पिता का हीरो बनने का सपना रह गया अधुरा, तब बेटे के जन्म से पहले ही लिया था प्रण–बेटे को हीरो बनाऊंगा

मित्रों वैसे तो फिल्म जगत में कई ऐसे अभिनेता है, जो बतौर बाल कलाकार अपने करियर की शुरूवात कर चुके है, और अपने अभिनय से लोगों के दिल में एक अलग ही जगह बना रखी है, ये कलाकार बचपन में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाने के पश्‍चात अब बड़े होकर इंड्रस्‍टी के साथ साथ हम लोगों के दिलों पर राज कर रहे है। जी हां आज हम जिसकी बात करने जा रहे है वह कोई और नही बल्‍कि बॉलीवुड के सिंघम अजय देवगन है। इनका नाम लेते ही हम सबके दिमाग में एक शांत, गंभीर और बेहतरीन अभिनेता की छवि बनती है, पर क्या आप लोग यह जानते कि अजय देवगन के पिता वीरू देवगन का हीरो बनने का सपना अधूरा रहा गया था, इसलिये उन्होनें अपने बेटे अजय देवगन को हीरो बनाने के लिये काफी संघर्ष किया।

दरअसल फिल्म जगत के सुपरस्टार अजय देवगन की फिल्में पिछले 30 वर्षो से करोड़ों की कमाई कर रही है, बता दें कि अजय देवगन केवल एक बहुत अच्छे एक्टर ही नही बल्कि एक अच्छे फ़िल्म निर्माता भी हैं, पिछले दिनो ही अजय देवगन ने अपनी पत्नी काजोल के साथ हेलीकॉप्टर ईला नाम की फ़िल्म को बनाया था। बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री के सिंघम कहे जाने वाले अजय देवगन के पिता वीरू देवगन 2 साल पहले ही इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं और आपको बता दें अजय देवगन के पिता वीरू का नाम फिल्म इंडस्ट्री के टॉप स्टंट मास्टर्स में शामिल था और वीरू देवगन हीरो बनने का सपना लेकर मुंबई आए थे लेकिन उनका यह सपना साकार नहीं हो पाया और इस वजह से वीरू देवगन ने खुद से यह वादा किया था वह अपने बेटे को हीरो जरूर बनाएंगे और आज हम आपको वीरू देवगन के इसी किस्से के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि साल 1957 में वीरू देवगन अपने कुछ साथियों के साथ फिल्म इंडस्ट्री में हीरो बनने ख्वाब अपनी आंखों में भर कर अमृतसर से मुंबई आए थे और उस वक्त वीरू देवगन की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी और पैसों की तंगी की वजह से उन्होंने ट्रेन की टिकट तक नहीं खरीदी जिसके चलते उन्हें जेल भी जाना पड़ा था और जेल जाने के बाद वीरू देवगन के कुछ दोस्त काफी ज्यादा डर गए थे और वो वापस अमृतसर चले गए पर वीरू देवगन जो सपना देखे थे, उसे पूरा करने के लिए मुंबई में ही रह गये  और छोटे-मोटे काम करके वो अपना गुजर-बसर करने लगे।

वहीं मुंबई में रहने के दौरान वीरू देवगन बॉलीवुड के कई फिल्म  निर्माताओं निर्देशकों से मिले और उनसे बात की पर उन्हें हर बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा और फिर कुछ समय के बाद वीरू देवगन को यह एहसास हो गया कि फिल्म इंडस्ट्री में बतौर  अभिनेता करियर बनाने के लिए एक रिच स्किन टोन होना सबसे जरूरी है जो कि उनके पास नहीं था और इस वजह से वीरू देवगन का हीरो बनने का सपना अधूरा रह गया पर तब उन्होंने खुद से एक वादा किया था कि भले ही खुद वो हीरो नहीं बन पाए पर अपने बेटे को फिल्म इंडस्ट्री में हीरो जरूर बनाएंगे, और उन्होंने अपने सेकिये गये वादे को बखूबी पूरा किया। इस जानकारी के संबंध में आप लोगों की क्या प्रतिक्रियायें है। मित्रो अधिक रोचक बाते व लेटेस्‍ट न्‍यूज के लिये आप हमारे पेज से जुड़े और अपने दोस्तो को भी इस पेज से जुड़ने के लिये भी प्रेरित करें।

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